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अपने बारे में


                                                                      My Nobel father image

 हेल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम राकेश रंजन है,
 संक्षेप में अपने बारे में कुछ बताना चाहूँगा की अभी मेरा P.g का क्लास चल रहा होता लेकिन मेरी अपनी गलती के कारन मैं अभी B.a में हूँ. मेरी गलती कुछ इस तरह की है की जब मैं 9th क्लास का स्टूडेंट था तभी मैं घर से भाग कर देल्ही चला गया. ये सोच कर भागा था की मैं देल्ही में कामाऊंगा और आराम से रहूँगा.... खैर जो भी सोचा था.
                स्टेशन पर जैसे ही उतरा मैं किसी के द्वारा ट्रैप हो गया और मुझे पता भी नहीं चला; और मुझे देल्ही से दूर गाज़ियाबाद के एक छोटे से क़स्बा चिरौरी नामक जगह पर ले जाकर होटल में सेट कर दिया गया
 और वहां पर मुझसे होटल के वे सभी काम करवाए गए जो मेरे ईगो,खानदानी इज्ज़त,मेरे स्टेटस् सब के विरुद्ध था;लेकिन मरता क्या नहीं करता. इस जद्दोज़हद और नरकीय ज़िन्दगी से उबरने के कशमकश में मैं ये भी भूल गया की मैं क्या सोच कर आया था. आखिर भूलता भी क्यों नहीं ज़िंदगी, की हकीक़त से सामना जो कुछ ही मिनट में हो गया मैं. मैं  समझ गया की कुछ सोच कर हासिल करने के लिए निकलना कितना आसान है या भारी. तब जाकर मुझे एहसास हुआ,इन फैक्ट आई ऍम टू चाइल्ड एन्ड इनोसेंट,आई ऍम  नॉट एबल टू फेस  दीस क्रूएल वर्ल्ड.... फिर क्या था किसी तरह मैं वहां से भागा, लेकिन ज़िन्दगी के प्रति अँधेरा में कोई कमी नहीं क्योंकि होटल से भागा, अब कहाँ जायें,वापस घर तो जा नहीं सकते क्योंकि वहाँ तो और मार खानी पड़ेगी. ये जानते हुये की मेरे बड़े भैया भी डेल्ही में ही रहते हैं....... वहाँ जा नहींसकता था क्योंकि, मुझे सिर्फ इतना मालुम था की- भैया डेल्ही में रहते हैं, लेकिन कहाँ रहते हैं,किस मुहल्ले में रहते हैं,कुछ नहीं मालूम. दिमाग पर जोर डाला तो याद आया की उस जगह का नाम खजूरी है जहाँ मेरे भैया रहते हैं.
                                               किसी तरह खजूरी पहुंचा तब जाकर ख़याल आया की "ये तो बहुत बड़ा जगह है यहाँ तो किसी व्यक्ति विशेष को ही हम खोज पायेंगे, हम जैसे कॉमन या ऑर्डिनरी को खोजना तो मेरे लिये नामुमकिन है. फिर सोचा एक चान्स लेना चाहिए,मैंने एक भद्र भाई से पूछा - भाई यहाँ एक राजेश नाम का एक लड़का है अंडे का होलसेल बिज़नेस करता........ तू उसका भाई है ?  (मेरे वाक्य पूरा होने से पहले ही  उन्होंने अपना काम छोड़ कर बीच में सवाल कर दिया.) मैंने अचंभित होकर, हाँ कर दिया. ये पूछने पर की आप कैसे जानते हैं उन्होंने कहा 'मैं तेरे भाई का दोस्त हूँ, तू जब से घर से भागा है तेरा भाई बहुत परेशान है उसी ने मुझे तेरे बारे में सारी बातें बताया' फिर उन्होंने मुझे मेरे भैया तक पहुंचाया.
                                      मेरे भैया मुझे इस तरह से लिपट कर आंसू बहाने लगे जैसे...... मैं उनके भावना को व्यक्त नहीं कर सकता. (एक्स्ट्रीमली सॉरी भाई जी )
उन्होंने मुझे बच्चे के तरह ट्रीट किया. सारा कपडा उतार कर खुद नहलाया, देट टाइम आई वाज फिफ्टीन इयर्स ओल्ड बट, इन व्यू ऑफ़  माय बिग ब्रदर आई वाज चाइल्ड एंड ही केयर ऑफ़ में लाइक चाइल्ड.
                     उन्होंने मेरे सपने को पूरा करने के लिए इस तरह जुट गए जैसे वो सपना मेरा नहीं उनका हो..... मेरा बचपन से सपना था मैं इंग्लिश का एक अच्छा स्टूडेंट बनूँ. जहाँ तक मेरा ख़याल है अभी तक मेरे संपर्क या जान पहचान का अभी तक कोई इंग्लिश का ककहरा तक नहीं जानता है. लेकिन अपनी तारीफ़ नहीं करूँगा... लेकिन आज...... आई ऍम ऑनली वन सक्सेस स्टूडेंट ऑर बॉय एमोंग माय सर्कल. टुडे आई केन स्पीक इंग्लिश करेक्टली एंड फ्लूएंटली. इसका सारा श्रेय मेरे बड़े भाई को जाता है की मेरे इस छोटे से सपने को पूरा करवाने के लिए बहुतों पैसे बर्बाद किये. अंत में उन्होंने मुझे एक इंग्लिश से P.hd किये टीचर ऑनरेबल अखिलेश सर के पास होम ट्यूशन लगा दिए. दिन में मुझे दो वक्त उनके पास पढने के लिए जाना पड़ता था. अंत में मैं अपने सपने को साकार करने में सफलता हासिल कर ही लिया लेकिन, लेकिन अपने भाई का सपना पूरा नहीं कर सका. मेरे सपनों के बिच उन्होंने एक अपना सपना भी ऐड कर दिए थे की - मैं भैया के क्षत्रछाया में रह कर कम-से-कम डेल्ही यूनिवर्सिटी से बी.ए फाइनल कर लूं, उनका सपना था की मेरा भाई भी डेल्ही के कॉलेज में पढने जाए.मेरे भैया ने मेरे लिए वो सब किया जो मेरे पापा चाह कर  भी   मेरे  लिए उतना  खर्च  नहीं  कर  सकते  थे.

                                             
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Hello friends I am rakesh ranjan from Madhepura, I want to say somethin in brief about me. thay my Pg class had been gone but due to some problem still I am student of b.a. and that problem is created by me.



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